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शिर्डी से सीधा प्रसारण ,... "श्री साँई बाबा संस्थान, शिर्डी " ... के सौजन्य से... सीधे प्रसारण का समय ... प्रात: काल 4:00 बजे से रात्री 11:15 बजे तक ... सीधे प्रसारण का इस ब्लॉग पर प्रसारण केवल उन्ही साँई भक्तो को ध्यान में रख कर किया जा रहा है जो किसी कारणवश बाबा जी के दर्शन नहीं कर पाते है और वह भक्त उससे अछूता भी नहीं रहना चाहते,... हम इसे अपने ब्लॉग पर किसी व्यव्सायिक मकसद से प्रदर्शित नहीं कर रहे है। ...ॐ साँई राम जी...

Monday, 3 October 2011

चरण चाकरी दे देना

ॐ साईं राम

साईं तुम्हारे खाते में नाम हमारा लिख लेना,,
चरण चाकरी दे देना अपनी शरण में ले लेना...
तेरी पूजा तेरी भक्ति, देती है जीने की शक्ति..
तुझको शत-शत है प्रणाम, मिलकर बोलो साईं राम...

जब तक रहूं मैं ज़िन्दा इज़्ज़त की भीख़ देना

ॐ सांई राम



तेरे नाम के सहारे जीवन बिता रहा हूं
जैसी भी निभ रही है वैसी निभा रहा हूं


तुम सबके राज़दां हो हर दिल की जानते हो
फ़िर भी ये हाले दिल मैं तुमको सुना रहा हूं
मुझसे सहा न जाये अब ग़म ये ज़िन्दगी का
नन्हीं सी जाँ पे कैसे सदमे उठा रहा हूं


जब तक रहूं मैं ज़िन्दा इज़्ज़त की भीख़ देना
ये आस लेके साँई तेरे दर पे आ रहा हूं
दीदार की तलब से हाज़िर हुआ है बन्दा
मुद्द्त से मेरे साँई तेरे दर पे आ रहा हूं
तेरे नाम के सहारे जीवन बिता रहा हूं
जैसी भी निभ रही है वैसी निभा रहा हूं

माँ कालरात्रि

एकवेणी   जपाकरणपूरा  नग्ना खरास्थिता |
लम्बोष्ठी कर्णिकाकणी तैलाभ्यक्तशरीरिणी ||
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषण         |
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिभरयंकरी    ||



माँ दुर्गा की सातवी शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है | इनके शरीर का रंग घने अन्धकार की तरह काला होता है | बाल बिखरे हुए हैं | गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला है | इनके तीन नेत्र हैं | ये तीनो नेत्र ब्रम्हांड के समान गोल हैं | इनके श्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालायें निकलती रहती हैं | इनका वाहन गदर्भ ( गधा ) है | ऊपर उठे दाहिने हाथ से सबको वर प्रदान करती हैं | दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है | बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का काँटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग ( कटार ) है | माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है परन्तु ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं | इसलिए इनसे किसी भी प्रकार से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है |

Sunday, 2 October 2011

दया की छाँव वाला Tent ढूंढा है ,,..

ॐ साईं राम
  

Lovely सा बाबा Decent ढूंढा है,.
 
No Temprary, Permanent ढूंढा  है,.

शीश  साकार  है  साचा  दातार  है,..
 
Lovely है  साईं  मेरा, Lovely दरबार  है,..
 
दवार यह  साचा Cent-Percent ढूंढा है,. 

Lovely सा बाबा Decent ढूंढा है,.

हां उस साईं के,ना कोई कमी है...
 
भक्त  हैं  Happy तो  ना  कोई  ग़मी  है ..
 
दया  की  छाँव वाला Tent ढूंढा है ,,..

Lovely सा बाबा Decent ढूंढा है,....

साईं की मोहब्बत

ॐ साईं राम
 साईं की मोहब्बत को दिल से तू लगा रखना
 
हर पल साईं बाबा के भजनों को सुना करना 
जीवन की कश्ती को वो पार लगा देंगे
 
मुश्किल हों राहें जो आसान बना देंगे
बस बन के उसी का तू दुनिया में रहा करना

अपना बनाया साईं ने

ॐ साईं राम 


दर दर मैं तो भटक रहा था …
दर दर मैं तो भटक रहा था …
अपना बनाया साईं ने |
कई जन्मो से तड़प रहा था ...
अपना बनाया साईं ने ...
मुझे अपनाया साईं ने |


 ख़ुद खाया तो क्या खाया,
अपनी  भूख  बुझाय |
जो भूखों को खाना दे,
वो साईं को भाये |

माँ कात्यायनी

चन्द्रहासोजज्वलकरा   शार्दूलवरवाहना |
कात्यायनी शुभं दधादेवी दानवघातिनी ||


माँ दुर्गा के छठवें स्वरूप का नाम कात्यायनी है | इनका कात्यायनी नाम पड़ने की कथा इस प्रकार है - कत नाम के एक प्रसिद्ध महार्षि थे | उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए | इन्ही कात्य के गोत्र में महार्षि कात्यायन उत्पन हुए थे | इन्होने भगवती पराम्बा की बहुत कठिन उपासना की थी | उनकी इच्छा थी की माँ भगवती उनके घर पुत्री रूप में जन्म ले | माँ भगवती ने उनकी ये प्रार्थना स्वीकार कर ली | कुछ काल पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बहुत बढ़ गया जब ब्रम्हा, विष्णु, महेश तीनो ने अपने अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन किया | इन देवी ने महार्षि कात्यायन के घर पुत्री रूप में जन्म लिया | महार्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की | इसी कारण ये कात्यायनी कहलाई |

Saturday, 1 October 2011

आज तेरे दर पर आया हूँ

ॐ सांई राम


बाबा मुझे भी इंसान बना दो
तुम्हारे दर पर खड़ा हूँ
थक गया हूँ जीवन से
सर से सारा भार उतार दो
झूठ , फरेब ,क्रोध , मोह के
चक्रव्यूह में फसा हुआ हूँ
माया के जाल से
मुझे आज मुक्त करा दो
जीवन की तीखी धूप ने
मेरी भावनाओं को झुलसा दिया है
इस तपती धूप पर
अपनी ठड़ी छाव बिछा दो
करूणा, क्षमा का वास
जीवन से मिट गया है
इस कठोर दिल को
दया का पाठ पड़ा दो
धन दौलत की आस ने
बिखेर दिया है मुझे
इस टूटे हुए आईने को
समेट लो अपने हाथो में
 

आज तेरे दर पर आया हूँ
खाली ना लौट के जाऊगा
तेरे विश्वास को अपनी
आत्मा में बसाऊगा
तुझे अपना बनाऊगा
जीवन की हर ठोकर खायी है मैंने
अब ना अपनी गलती दोराहुगा
थाम लुगा तेरा आचल
और इंसान बनके जाऊगा

माँ कूष्मांडा और स्कन्दमाता

 सुरासंपूर्णकलशं                रुधिराप्लुतमेव   च | 
दधाना हस्त पद्माभ्याम कूष्मांडा शुभदास्तु  मे ||

माँ दुर्गा जी के चौथे स्वरूप का नाम कूष्मांडा है | अपनी मंद हलकी हंसी द्व्रारा अंड अर्थात ब्रम्हांड को उत्पन करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से अभिहित किया गया है | जब सृष्टि का आस्तित्व नहीं था, चारों ओर अन्धकार ही अन्धकार था, तब इन्ही देवी ने अपने हास्य से सृष्टि की रचना की थी | इस कारण यही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदि-शक्ति हैं | इनसे पूर्व ब्रम्हांड का आस्तित्व था ही नहीं |
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सिंहासनगता  नित्यं      पदमाश्रितकरद्व्या |
शुभदास्तु    सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी ||



माँ दुर्गा जी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है | ये भगवान स्कन्द " कुमार कार्तिकेय " नाम से भी जाने जाते हैं | ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे | पुराणों में इन्हें कुमार और शक्तिधर कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है | इनका वाहन मयूर है | इन्ही भगवान स्कन्द की माता होने के कारण माँ दुर्गा के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है |  

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एक 18 साल का लड़का ट्रेन में खिड़की के पास वाली सीट पर बैठा था. अचानक वो ख़ुशी में जोर से चिल्लाया "पिताजी, वो देखो, पेड़ पीछे जा रहा हैं". उसके पिता ने स्नेह से उसके सर पर हाँथ फिराया. वो लड़का फिर चिल्लाया "पिताजी वो देखो, आसमान में बादल भी ट्रेन के साथ साथ चल रहे हैं". पिता की आँखों से आंसू निकल गए. पास बैठा आदमी ये सब देख रहा था. उसने कहा इतना बड़ा होने के बाद भी आपका लड़का बच्चो जैसी हरकते कर रहा हैं. आप इसको किसी अच्छे डॉक्टर से क्यों नहीं दिखाते?? पिता ने कहा की वो लोग डॉक्टर के पास से ही आ रहे हैं. मेरा बेटा जनम से अँधा था, आज ही उसको नयी आँखे मिली हैं. #नेत्रदान करे. किसी की जिंदगी में रौशनी भरे.